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आत्मरक्षा के पाठ से बन रहीं रक्षक



इंदौर में हुई तीन महीने चार दिन की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या की घटना ने शहर ही नहीं प्रदेश और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। यह सोचने को मजबूर कर दिया कि जब समाज में अबोध मासूम ही अपनों के बीच सुरक्षित नहीं है, तो बच्चियों की सुरक्षा के लिए क्या किया जाए। महिलाओं के प्रति बढ़ते अपराध, छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को देखते में माता-पिता ने अपनी बच्चियों को सेल्फ डिफेंस का प्रशिक्षण देने के साथ औरों की रक्षा के गुर भी सिखाना शुरू कर दिया है। सेल्फ डिफेंस सीखने पहुंचने वाली लड़कियों की संख्या में दिनोंदिन बढ़ोतरी हो रही है। यही वजह है इंदौर और उज्जैन संभाग की लड़कियों को जूडो कराते से लेकर बैंड, योगशाप, समता और राइफल चलाना भी सिखाया जा रहा है। जूडो-कराते सीखकर बन रहीं निर्भयउज्जैन के ऋषिनगर में 5 मई से शौर्य प्रशिक्षण वर्ग दुर्गा वाहिनी द्वारा लड़कियों को बैंड, योगदंड, योगचाप, नियुद्ध (जुडो-कराते), समता, राइफल सिखाया जा रहा है। साथ ही बौद्धिक विकास किया जाता है, जिसमें सभी को भारतीय संस्कृति के बारे में बताया जा रहा है। खासतौर पर हमारी भारतीय संस्कृति में कितना बदलाव आ गया है? क्या सही व क्या गलत बदलाव हो गए हैं, इन्हें कैसे सुधारा



जा सकता है, जैसी तमाम बातें सिखाई जा रही हैं। प्रशिक्षण लेने के लिए प्रदेशभ्र से करीब 200 लड़कियां शामिल हुई हैं। इनमें इंदौर की 30 लड़कियां भी शामिल हैं। इन्हें आत्मरक्षा के साथ दूसरों की सुरक्षा के गुर सिखा रहे हैं। उम्र के अनुसार आत्मरक्षा का प्रशिक्षण जिला संयोजिका मुस्कान पाटीदार ने बताया कि प्रतिवर्ष लड़कियों को प्रशिक्षित किया जाता है। हर साल लड़कियों की संख्या बढ़ रही हैं। प्रशिक्षण केंद्र में हर जिले से कम से कम दो से तीन शिक्षिकाएं शामिल होती हंै। यह सभी शिक्षिकाएं सभी लड़कियों को उनकी उम्र के मुताबिक प्रशिक्षण दे रही हैं। इसके अलावा इंदौर शहर की संस्था ज्वाला ने भी शहर की युवतियों को कराते सिखाकर आत्मरक्षा करने का गुर सिखाया है। प्रशिक्षण ऐसा कि खुद के साथ कर सकें औरों की भी सुरक्षा दुर्गा वाहिनी की क्षेत्रीय संयोजिका माला सिंह ठाकुर ने बताया कि बदलते समय को देखते हुए लड़कियों को हर तरह से खुद की रक्षा करना और मौका आने पर औरों की रक्षा करने के काबिल बनाना बेहद आवश्यक है। इसके लिए पालक भी अपनी बेटियों को प्रशिक्षण दिलाना चाहते हैं। इस दौरान अभ्यास सत्र भी लगाया जाता है, जिसमें बाल संस्कार केंद्र और साधना केंद्र लगता है ताकि वह सभी प्रशिक्षण लेकर अपने-अपने जिलों में जाकर अन्य युवतियों को तैयार कर सकें।





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