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B day: साहिर लुधियानवी - प्रेमिका के पिता ने निकलवा दिया था कॉलेज से



दो बार फिल्मफेयर अवार्ड जीते, उनके गानों को आज भी लोग सुनना पसंद करते हैं जबलपुर। हिन्दी सिनेमा के सुनहरे दौर में ऐसे तो कई प्रसिद्ध गीतकार  हुए हैं, लेकिन उनमें खास मुकाम व पहचान बनाने वाले गिने-चुने लोग ही है। ऐसे ही एक शायर व गीतकार हुए साहिर लुधियानवी। जिन्होंने न सिर्फ हिन्दी सिनेमा में उनके योगदान को लोग आज भी याद करते हैं। उनके लिखे गीत आज भी लोगों की जुबां पर चढ़े हुए हैं। साहिर लुधियानवी को सन् 1964 और 1977 में सर्वश्रेष्ठ गीतकार के लिए फिल्मफेयर अवार्ड दिया गया था।मां के साथ गरीबी में गुजारासाहिर लुधियानवी का असली नाम अब्दुल हयी साहिर है। उनका जन्म 8 मार्च 1921 में लुधियाना के एक जागीरदार घराने में हुआ था। इनके पिता बहुत धनी थे, परंतु माता-पिता में अलगाव होने के कारण उन्हें माता के साथ गरीबी में गुजर करना पड़ा। साहिर की शिक्षा लुधियाना के खालसा हाई स्कूल में हुई। सन् 1939 में जब वे गर्वनमेंट कालेज के छात्र थे तब उन्हें कॉलेज की छात्रा अमृता प्रीतम से प्रेम हो गया, लेकिन वो ज्यादा दिनों तक नहीं चल

सका। कॉलेज़ के दिनों में साहिर अपने शेरों के लिए साहिर



लुधियानवी के नाम से ख्यात हो गए थे और अमृता इनकी सबसे बड़ी प्रशंसक बन गईं। अमृता के घरवालों को ये प्रेम रास नहीं आया क्योंकि एक तो साहिर मुस्लिम थे और दूसरे गरीब। बाद में अमृता के पिता के कहने पर उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया। लाहौर आए, संपादन कियासन् 1943 में साहिर लुधियानवी लाहौर आ गये और उसी वर्ष उन्होंने अपनी पहली कविता संग्रह तल्खियां छपवाई। तल्खियाँ के प्रकाशन के बाद से ही उन्हें अपनी एक पहचान मिली। सन् 1945 में वे प्रसिद्ध उर्दू पत्र अदब-ए-लतीफ और शाहकार (लाहौर) के सम्पादक बने। बाद में उन्होंने द्वैमासिक पत्रिका सवेरा का भी संपादन किया। इस पत्रिका में उनकी किसी रचना को सरकार के विरुद्ध समझे जाने के कारण पाकिस्तान सरकार ने उनके खिलाफ  वारंट जारी कर दिया। उनके विचार साम्यवादी थे जिसके चलते उन्होंने पाकिस्तान छोड़ दिया और सन् 1949 में वे दिल्ली आ गए। कुछ दिनों दिल्ली में रहकर वे बंबई (वर्तमान मुंबई) आ गये जहां उन्होंने उर्दू पत्रिका शाहराह और प्रीतलड़ी के लिए बतौर संपादक काम किया।आजादी के लिए पहला गीत

लिखासन् 1949 में फिल्म आजादी की राह पर के लिए साहिर ने पहली बार गीत लिखे थे। किंतु बतौर गीतकार प्रसिद्धि उन्हें फिल्म नौजवान गीत ठंडी हवाएं लहरा के आएं... से मिली, जिसे सचिनदेव ने संगीतबद्ध किया था। इस सफलता के बाद साहिर लुधियानवी ने बाजी, प्यासा, फिर सुबह होगी, कभी कभी जैसे सुपरहिट फिल्मों के लिए गीत लिखे। सचिनदेव बर्मन के अलावा एन. दत्ता, शंकर जयकिशन, खैय्याम सहित उस दौर के सभी बड़े संगीतकारों ने उनके लिखे गीतों की धुनें बनाईं। 59 वर्ष की आयु में 25 अक्टूबर 1980 में 59 वर्ष की आयु में दिल का दौरा पडऩे से साहिर लुधियानवी का निधन हो गया।फिर नहीं की शादीसाहिर का अमृता से प्रेम असफल रहा फिर मुंबई में उन्हें सुधा मल्होत्रा से प्रेम हुआ, लेकिन इसका हश्र भी वहीं हुआ। इकसे बाद वे आजीवन अविवाहित ही रहे। उन्होंने अपने जीवन को कविताओं व शेरों में भी उतारा, जिसमें गरीब प्रेमी के जीवन की गाथा भी दिखाई देती है। मैं फूल टांक रहा हूं तुम्हारे जूड़े मेंतुम्हारी आंख मुसर्रत से झुकती जाती हैन जाने आज मैं क्या बात कहने वाला हूँजबान खुश्क है

आवाज रुकती जाती हैतसव्वुरात की परछाइयां उभरती हैंरॉयल्टी वाले पहले गीतकारसाहिर हिन्दी सिनेमा जगत ऐसे पहले गीतकार थे जिन्हें अपने गानों के लिए रॉयल्टी मिलती थी। उनके प्रयास के बावजूद ही संभव हो पाया कि आकाशवाणी पर गानों के प्रसारण के समय गायक तथा संगीतकार के अतिरिक्त गीतकारों का भी उल्लेख किया जाता था। इससे पहले तक गानों के प्रसारण समय सिर्फ गायक तथा संगीतकार का नाम ही उद्घोषक द्वारा लिया जाता था।साहिर के प्रसिद्ध गीतआना है तो आ राह में कुछ ... फिल्म नया दौर 1957, संगीतकार ओपी नैय्यरअल्लाह तेरो नाम, ईश्वर तेरो नाम...फिल्म हम दोनो 1961, संगीतकार जयदेवचलो एक बार फिर से अजनबी बन जाएं... फिल्म गुमराह 1963,  संगीतकार रविमन रे तू काहे न धीर धरे ... फिल्म चित्रलेखा 1964, संगीतकार रोशनमैं पल दो पल का शायर हूं ... फिल्म कभी-कभी 1976, संगीतकार खैय्यामयह दुनिया अगल मिल भी जाए तो क्या है ... फिल्म प्यासा 1957, संगीतकार एसडी बर्मनईश्वर अल्लाह तेरे नाम सबको संमति... फिल्म नया रास्ता 1970, संगीतकार एन दत्ता अपनी कम्युनिटी से वैवाहिक प्रस्ताव पाएं और तुरंत उनसे वाट्सएप्प / फ़ोन पर बात करें।३,५०,००० मेंबर्स की तरह

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