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इंदौर को नं.1 बनाना नहीं था इतना आसान,शहर के सामने थी ये चुनौतियाँ



इंदौर. भारत का सबसे स्वच्छ शहर बनने का मौका दोबारा जिस शहर को मिला है वो सौभाग्यशाली शहर इंदौर है। सफाई के मिशन में जुटे निगम की राह में रोड़े भी कम नहीं थे। नकारा कर्मचारियों पर सख्ती के साथ ही जमींदारी प्रथा को भी खत्म किया गया। लोगों को जागरूक कर संसाधन भी जुटाए और आखिर बना दिया शहर को फिर से नं.1.....आइए बताते हैं आपको क्या थीं इंदौर को नंबर वन बनाने के पहले चुनौतियां न डरे, न रुके... बस लक्ष्य का पीछा करते रहे कदमराजनीतिक : स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने महापौर से राजनीतिक लड़ाई के चलते सफाई के साथ ही निगम के कामों से दूरी बना ली थी। इससे निगम का पूरा सफाई अमला नेतृत्वविहीन हो गया। कई सफाई कर्मचारी नेता कर्मचारियों पर कार्रवाई के विरोध में खड़े हो गए। विपक्षी पार्षदों ने डोर टू डोर कचरा कलेक्शन पर शुल्क का विरोध किया। नकारा कर्मचारियों से काम कराना : ऐसे सफाई कर्मचारी, जो पगार तो लेते थे, लेकिन काम नहीं करते थे, उनसे काम कराना भी बड़ी चुनौती था। निगमायुक्त ने इन पर नकेल कसी और काम से गायब रहने वाले कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करना शुरू किया। 500 से ज्यादा



कर्मचारियों को निकाला तो 200 से ज्यादा सस्पेंड किए गए। विरोध में सफाई कर्मचारियों ने हड़ताल की तो उसका भी डटकर मुकाबला किया। जमींदारी प्रथा : कई सफाई कर्मचारियों ने परंपरा बना ली थी कि वे या उनके परिवार

के लोग ही सफाई करेंगे और जनता से पैसे भी लेंगे। वे नगर निगम के कर्मचारियों को काम नहीं करने देते थे। इस प्रथा का अंत करने के लिए वाल्मीकि समाज के सभी नेताओं से चर्चा की गई। इस प्रथा को सख्ती से खत्म किया गया। आवश्यक संसाधन : निगम के पास कचरा वाहन और अन्य संसाधनों की कमी थी। पुराने वाहनों को वर्कशॉप में सही करवाया। छोटे वाहनों की खरीदी पर जोर दिया, ताकि कचरा घरों से लेने में आसानी रहे। जेसीबी मशीनों को दोपहर तक नगर निगम के कामों में और सुबह व शाम सफाई काम में लगाया गया। लोगों को जागरूक करना : जनता को जागरूक करना बड़ी चुनौती थी। खुले में शौच करने वालों को डिब्बा गैंग के माध्यम से रोका। कचरा फैलाने वालों पर जुर्माना किया गया। ट्रेंचिंग ग्राउंड : शहर से रोजाना निकलने वाले 800 टन कचरे के निपटारे के लिए व्यवस्था की। जहां 500 टन कचरे को खाद बनाने में उपयोग किया। वहीं पुराने कचरे के ढेर लैंडफिल के जरिए खत्म करने का काम शुरू किया। कचरे में लगने वाली आग रोकने के लिए कचरे के ढेरों को बीच से काटकर उसमें जगह बनाई ताकि आग न फैल सके।  एक साल पहले इंदौर के ये थे हालात संसाधनों की फौज5400सफाई कर्मचारी सिर्फ 400छोटी गाडिय़ां घर-घर से कचरा उठाने के लिए16कचरा कॉम्पेक्टर20लार्ज हॉलिंग 24 जेसीबी मशीन50 डंपर06 ट्रांसफर स्टेशन1000 डस्टबिन12549 एकल शौचालय174 सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय जीर्णोद्धार17मोबाइल शौचालय61नए सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय200 पेशाबघर

जीर्णोद्धार200नए पेशाबघर400





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