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केजरीवाल और तीन मंत्री राजभवन में धरने पर बैठे, पुलिस ने सांसद संजय सिंह को मिलने से रोका



केजरीवाल और तीन मंत्री राजभवन में धरने पर बैठे, पुलिस ने सांसद संजय सिंह को मिलने से रोका
दिल्ली में आईएएस अफसरों की हड़ताल के खिलाफ मुख्यमंत्री केजरीवाल और तीन मंत्री राजभवन में धरने पर ।
केजरीवाल और तीन मंत्री राजभवन में धरने पर बैठे, पुलिस ने सांसद संजय सिंह को मिलने से रोका
सीएम समेत 4 मंत्री एलजी हाउस में और टीम केजरीवाल सड़क पर जमी।
  • उपराज्यपाल ने कहा- बिना किसी कारण के धरना, मुख्यमंत्री ने दी धमकी

नई दिल्ली. मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री समेत उनके तीन मंत्री सोमवार को उपराज्यपाल अनिल बैजल के निवास (उपराज्यपाल सचिवालय) के अंदर सोमवार शाम 5:30 बजे से धरने पर बैठ गए। केजरीवाल ने तीन मांगों को मंजूर किए जाने तक धरने पर रहने का ऐलान किया है। केजरीवाल की अगुआई में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन और श्रम मंत्री उपराज्यपाल से मिलने राजनिवास गए थे। ये लोग राजभवन के वेटिंग रूम में


बैठे रहे, जबकि उपराज्यपाल अपने दफ्तर से आवास पर चले गए। धरने की सूचना के बाद आधा दर्जन से ज्यादा आईपीएस अधिकारी, एक दर्जन से ज्यादा इंस्पेक्टर समेत करीब डेढ़ सौ पुलिसकर्मी राजनिवास के बाहर सुरक्षा के लिए मौजूद थे। सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर दी गई। राज्यसभा सांसद संजय सिंह को भी केजरीवाल से मिलने जाने से रोक दिया गया। उन्होंने इसकी शिकायत राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखकर की है।

ये हैं तीन मांगें

- मनीष सिसोदिया ने ट्वीट में कहा कि उपराज्यपाल से तीन मांगें की गई हैं। पहली यह कि दिल्ली सरकार में कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों की हड़ताल खत्म कराई जाए। दूसरी, काम रोकने वाले आईएएस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और तीसरी मांग है कि राशन की दरवाजे पर आपूर्ति की योजना को मंजूर किया जाए।

- बता दें कि दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर कथित मारपीट के बाद आईएएस पिछले करीब चार माह से हड़ताल पर हैं।


दिल्ली पूर्ण राज्य बना तो हर वोट भाजपा को

-आप सरकार ने दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा। इसके पास होने के बाद केजरीवाल ने कहा, ''अगर केंद्र सरकार लोकसभा चुनाव से पहले दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दे देती है, तो पूरी दिल्ली भाजपा को वोट करेगी। यहां तक कि हम भी उनके लिए प्रचार करेंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो दिल्ली की जनता हाथों में "भाजपा दिल्ली छोड़ो" के बोर्ड होंगे।''

- "दिल्ली ऐतिहासिक शहर है, लेकिन इसका दुर्भाग्य रहा कि यहां सिर्फ राजाओं का शासन रहा, जनता का नहीं हो पाया। दिल्ली के लोग 1 लाख 30 हजार करोड़ टैक्स भरते हैं, पर बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता। उम्मीद है कि भाजपा दिल्ली को सैकड़ों साल पुरानी राजशाही से मुक्ति दिलाएगी।''

सुबह से ही तैयार थी स्क्रिप्ट ; एलजी हाउस जाने से 6 घंटे पहले पीसी, ट्विटर और विस में एलजी पर 21 बार हमला

- दिल्ली में सोमवार को पूरे दिन किसी पाॅलिटिकल मूवी की तरह ड्रामा चला। ऐसा लगा, मानो पूरी स्क्रिप्ट पहले से तैयार हो। सीएम ने राजनिवास जाने से पहले पूरे दिन में एलजी पर 21 से ज्यादा बार हमला बोला। सुबह 11 बजे प्रेस कांफ्रेंस में 11 बार और विस में 10 बार एलजी पर सीधा निशाना साधा। एलजी पर भाजपा का वॉइसराय, केंद्र का एजेंट, दिल्ली का महाराज जैसे तंज कसे। इसके अलावा ट्विटर पर भी उन्हें घेरा।
- सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कांफ्रेंस में एसीबी व सीबीआई को दिल्ली के मंत्रियों से जुड़े केस भेजने को लेकर 8 बार उपराज्यपाल अनिल बैजल व पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग का नाम लिया। तीन बार यह भी कहा कि केंद्र ने दिल्ली में एलजी को जनहित के कार्य रोकने की जिम्मेदारी दी है। शाम को विधानसभा में मुख्यमंत्री ने भाषण के दौरान अंग्रेजों के वॉइसराय का राज हटाकर एलजी राज शुरू करने से भाषण की शुरुआत करने के बाद 10 बार अलग-अलग तरीके से दिल्ली के उपराज्यपाल या अनिल बैजल का नाम लिया।

सीएम की मांग है कि हड़ताली अफसरों पर कार्रवाई हो, सीएस ने बयान जारी कर कहा- हम हड़ताल पर नहीं हैं

दिल्ली में कोई अधिकारी या कर्मचारी 19 फरवरी की आधी रात को सीएम आवास पर मारपीट की घटना के बावजूद हड़ताल पर नहीं है। घटना के बाद अधिकारियों ने उपराज्यपाल, गृहमंत्री, कैबिनेट सेक्रेटरी से मुलाकात के अलावा कैंडल मार्च भी निकाला था लेकिन काम प्रभावित नहीं किया। यहां तक की छुट्टी के दिन भी कई बार काम किया। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने एक बार बैठक का संदेश भेजा लेकिन फिर बाद में मुलाकात का टाइम नहीं दिया। न ही उनकी तरफ से मामला सुलझाने का कोई प्रयास किया गया।

तंज...पहले महाराज नजीब थे, अब महाराज बैजल हैं
- सिसोदिया की तरफ से रखा गया प्रस्ताव विधानसभा में 4 दिन की चर्चा के बाद पास किया गया। इससे पहले सीएम ने कहा दिल्ली में राजाओं का राज रहा। पहले महाराज अकबर, महाराजा औरंगजेब, बहादुरशाह जफर, अंग्रेज उसके बाद 1992 में जो धोखा दिल्ली के साथ हुआ उसके बाद महाराज एलजी। इसमें पहले महाराज नजीब जंग थे और अब महाराज बैजल हैं। देश को आजादी मिल गई लेकिन दिल्ली के नागरिकों को सेकेंड क्लास सिटीजनशिप मिली।

मेरी बेटी को कुछ हो जाए तो एलजी मिलते हैं क्या?
- सीएम ने कहा, मेरी बेटी के साथ कुछ हो जाए तो पीएम या एलजी मिलते हैं क्या? सीसीटीवी नहीं लगेंगे। बैजल की चलेगी, एलजी की चलेगी या जनता का शासन होना चाहिए। दिल्ली सरकार के काम से दिल्ली की जनता का सीना 59 इंच चौड़ा हो गया है, 56 इंच नहीं। हमें हमारे कर का 30% लौटा दें तो सबको मकान 5 साल में दे दूंगा। एलजी साहब मकान नहीं बनने देते, जमीन नहीं देते। पूर्ण राज्य होने पर स्कूल-कॉलेज और नौकरी में 85 % आरक्षण देंगे।

विधानसभा में गैरहाजिर रहने पर पहली बार किसी सीएम के खिलाफ दायर की गई याचिका

करावल नगर विधानसभा से आप के बागी विधायक कपिल मिश्रा ने सीएम केजरीवाल के विधानसभा में अनुपस्थित रहने पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। यह पहला मामला है, जब किसी सीएम के विधानसभा में अनुपस्थित रहने पर याचिका दायर की गई है।

कार्यकर्ताओं को संदेश भेजा गया बड़ी संख्या में पहुंचें
राजनिवास के अंदर मुख्यमंत्री अपने तीन मंत्रियों के साथ डटे हैं तो बाहर आम आदमी पार्टी के विधायक और आप के नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जमे हैं। आम आदमी पार्टी ने सुबह के लिए कार्यकर्ताओं को संदेश भेजा है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचें। नजदीकी मेट्रो स्टेशन तीस हजारी और सिविल लाइंस हैं।

याचिका में कोर्ट से की गईं ये तीन मांगें

- विधानसभाा में 50 फीसदी अनुपस्थिति पर सीएम और विधायकों को सैलरी न दी जाए।

-विधानसभा में विधायकों की 75% उपस्थिति अनिवार्य की जाए।

- कोर्ट एलजी और विधानसभा अध्यक्ष को सीएम की विस में उपस्थिति सुनिश्चित करने का आदेश दे।

उपस्थिति के लिए फिलहाल कोई नियम नहीं

- विधानसभा में विधायकों के लिए उपस्थिति के लिए अभी तक फिलहला ऐसा कोई नियम नहीं है, जिससे विधायक पर कार्रवाई हो सके।

- आर्टिकल 101 के अनुसार अगर सांसद (लोकसभा, राज्यसभा) 60 मीटिंग में अनुपस्थित रहता है तो उसके पद को रिक्त कर दिया जाता है।

13 जून तक कार्रवाई न की जाए : कोर्ट

हाईकोर्ट ने विधानसभा से अनुरोध किया कि वह शिक्षा सचिव संदीप कुमार, सेवा सचिव नागेंद्र कुमार और राजस्व सचिव मनीषा सक्सेना पर 13 जून तक कार्रवाई न करे। 7 जून को इन नौकरशाहों को विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों के सवालों के जवाब न देने पर सदन में पेश होने का निर्देश दिया था।





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