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नौतपा कल से....इस बार रोहिणी के जमकर तपने की संभावना...



सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आते ही 25 मई से नवतपा की शुरुआत होगी। यह तीन जून यानी नौ दिनों का रहेगा, जिसमें गर्मी भी तेज महसूस की जाएगी। उज्जैन. शास्त्र व पंचागीय गणना के अनुसार 25 मई को दोपहर 2.20 बजे सूर्य का रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश होगा। इसके साथ ही नौतपा की शुरुआत हो जाएगी। ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार इस बार रोहिणी के जमकर तपने की संभावना है। इसका असर आगामी वर्षा ऋ तु में दिखाई देगा। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में आते ही 25 मई से नवतपा की शुरुआत होगी। यह तीन जून यानी नौ दिनों का रहेगा, जिसमें गर्मी भी तेज महसूस की जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। इसकी राशि में सूर्य का परिभ्रमण तपिश पैदा करता है। इससे रोहिणी में भीषण गर्मी पड़ती है। सूर्यदेव के वृषभ राशि व रोहिणी नक्षत्र में परिभ्रमण के 13 दिन इसकी दिशा तथ वास के आधार पर वर्षा ऋ तु की स्थिति का बोध कराते हैं। ग्रह गोचर की स्थिति के अनुसार इस बार उत्तम वर्षा के संकेत नजर आ रहे हैं। पहला दिन अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ेगा। दोपहर 2.२० बजे इसका समय बताया गया है।



दो जून अधिक आषाढ़ कृष्ण पक्ष द्वितीया शनिवार तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में रहेगा। इस समय की ग्रह इस स्थिति में रोहिणी नक्षत्र में सूर्य हस्त में, चंद्र उत्तरा आषाढ़ में, भरणी में, बुध विशाखा में, आद्र्रा में, शुक्र पूर्व में स्थिर रहेंगे। सूर्य के रोहिणी संचरण काल में का वक्रत्व काल रहेगा। शनि अपनी वक्र दृष्टि का प्रभाव दिखाएंगे। नवतपा में बन रही ग्रहों की स्थिति के अनुसार इस दौरान तेज हवाएं व भीषण गर्मी के हैं। तेज गर्मी का असर वर्षाकाल में खंड वृष्टि के रूप में नजर आएगा, लेकिन उपरोक्त स्थितियों से वर्षा की अनुकूलता रहेगी। गर्मी का सितम जारीउज्जैन. भीषण गर्मी का सितम जारी है। एक दिन पूर्व की तुलना में तापमान ०.३ डिग्री कम होने के बाद भी गुरुवार को जैसे आसमान से आग बरस रहीं थी। दिनभर गर्म हवाओं ने सभी को बेचैन कर दिया। लगातार गर्म हवा चलने के कारण गुरुवार को अधिकतम तापमान ४३.५ डिग्री दर्ज किया गया। मौसम विज्ञानियों ने शुक्रवार से दिन के तापमान में कुछ राहत मिलने के आसार जताए हैं। पुण्य कमाने और दाग धोने के लिए मैली कर रहे शिप्राउज्जैन. शिप्रा शुद्धिकरण के तमाम प्रयासों के बाद भी मोक्षदायिनी मां शिप्रा दिन प्रतिदिन मैली होती जा रही है। इसके जिम्मेदार हम लोग ही हैं। पूजन के बाद नदी में निर्माल्य सामग्री बहाई जा रही है। हालांकि नदी से यह सामग्री निकालने के लिए वहां पर कर्मचारी डोंगी सहित तैनात रहते हैं, लेकिन इसके बाद भी किनारों पर हार-फूल और पूजन सामग्री नजर आती है। वहीं प्रतिबंध होने के बाद भी रामघाट पर साबुन से कपड़े धोते नजर आते हैं। कपड़ों के दाग मिटाने के लिए वे शिप्रा को मैली करने पर तुले हुए हैं। घाट पर मौजूद पुलिसकर्मी भी उन्हें रोकने की जहमत नहीं उठाते। अपनी कम्युनिटी से वैवाहिक प्रस्ताव पाएं और तुरंत उनसे वाट्सएप्प / फ़ोन पर बात करें।३,५०,००० मेंबर्स की तरह आज ही रजिस्टर करें |





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