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संकट में पाकिस्तान; सिर्फ 2 माह के आयात लायक विदेशी मुद्रा, 6 महीने में तीसरी बार घटाई अपने रुपए की कीमत



संकट में पाकिस्तान; सिर्फ 2 माह के आयात लायक विदेशी मुद्रा, 6 महीने में तीसरी बार घटाई अपने रुपए की कीमत
पाकिस्तानी रुपए की कीमत सोमवार को 4% घटाई गई। - सिम्बॉलिक
संकट में पाकिस्तान; सिर्फ 2 माह के आयात लायक विदेशी मुद्रा, 6 महीने में तीसरी बार घटाई अपने रुपए की कीमत
सिर्फ 10 अरब डॉलर बचा विदेशी मुद्रा भंडार, चालू खाते का घाटा 5.3% तक पहुंचा। - सिम्बॉलिक

  • पाकिस्तान में दिसंबर से अब तक रुपए का तीन बार डिवैलुएशन हो चुका है।
  • इस स्थिति से उबरने के लिए वह आईएमएफ से कर्ज लेगा।

नई दिल्ली/कराची. पाकिस्तानी रुपया सोमवार को 4% कमजोर हो गया। माना जा रहा है कि पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने इसकी कीमत घटाई है। दिसंबर से अब तक रुपए का तीन बार डिवैलुएशन हो चुका है। दिसंबर और मार्च में इसकी कीमत 5-5% घटाई गई थी। सात महीने में डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रुपए की कीमत 14% घट


गई है। यह एशियाई देशों में सबसे ज्यादा है। सोमवार को एक डॉलर 119.85 रुपए पर बंद हुआ। स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक का आकलन है कि साल के अंत तक पाकिस्तानी करेंसी की वैल्यू 125 रुपए तक गिर सकती है। हालांकि कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि एसबीपी ने कीमत नहीं घटाई। डॉलर की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने से पाकिस्तानी करेंसी कमजोर हुई है। एसबीपी ने हस्तक्षेप नहीं किया और इसे गिरने दिया। चर्चा है कि इस स्थिति से उबरने के लिए वह आईएमएफ से कर्ज लेगा। इससे पहले उसने 2013 में आईएमएफ से कर्ज लिया था। विशेषज्ञों का कहना है कि आईएमएफ करेंसी की वैल्यू घटाने के लिए कह सकता है। इसलिए पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि वह पहले से इसकी तैयारी कर रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए वह चीन से भी बात कर रहा है।

करेंसी सस्ती क्यों की: आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया

- करेंसी की वैल्यू घटाने का मकसद आयात कम करना और निर्यात बढ़ाना है। 20 लाख करोड़ रुपए (भारतीय) की इकोनॉमी वाले पाकिस्तान का चालू खाते का घाटा (सीएडी) जीडीपी के 5.3% तक पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ 10 अरब डॉलर का रह गया है। यह तीन साल में सबसे कम है और इससे सिर्फ दो महीने का आयात किया जा सकता है।

छह माह में विकासशील देशों की करेंसी का प्रदर्शन
पाकिस्तान 14.00%
फिलिपींस पिसो 5.32%
भारतीय रुपया 4.73%
इंडोनेशिया रुपिया 2.80%
चाइनीज युआन 3.32%
द.कोरिया वॉन 1.55%
ताइवान डॉलर 0.66%

भारत पर असर: गारमेंट, चावल निर्यात में मुश्किल

- पाकिस्तान मुख्य रूप से गारमेंट और चावल के निर्यात में भारत को टक्कर देता है। कुछ हद तक सीमेंट और इंजीनियरिंग गुड्स में भी। कम विकसित देश होने के कारण पाकिस्तान से आयात पर यूरोप में कोई शुल्क नहीं लगता, जबकि विकासशील देश होने के नाते भारत से आयात पर शुल्क लगता है। करेंसी सस्ती होने से पाकिस्तान का निर्यात ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है।

पाकिस्तान से 8 गुना बड़ी भारत की जीडीपी

पैमानाभारतपाक
जीडीपी160 लाख करोड़ रुपए20 लाख करोड़ रुपए
सीएडी1.5% जीडीपी के मुकाबले5.3% जीडीपी के मुकाबले
विदेशी मुद्रा भंडार412 अरब डॉलर10 अरब डॉलर

(भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के आयात के लिए काफी है, जबकि पाकिस्तान के पास सिर्फ दो महीने के लायक विदेशी मुद्रा है)





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