Spirituality

उगते सूर्य को अर्घ्य देने से, हो जाते हैं सारे कष्ट दूर



उगते सूर्य को अर्घ्य देने से, हो जाते हैं सारे कष्ट दूर हरिद्वार के पं. उदय किशोर मिश्रा ने बताया कि सूर्य को सविता, प्रसूता भी कहा जाता हैं अर्थात जन्मदाता, भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में सूर्य को जल देने की महिमा बताई गई है । वैदिक काल से ही सूर्य उपासना होती आई है । सभी पुराणों में इसकी चर्चा विस्‍तार से की गई है, दरअसल, सूर्य को ब्रह्माण्ड का प्रत्यक्ष देवता माना जाता है ।   कहा जाता है कि जो भी भक्त या उपासक अपने आराध्य ईष्ट के साक्षात दर्शन करना चाहते हैं वे उगते हुए सूर्य में दर्शन कर सकते हैं, इसलिए तो भगवान श्री सूर्य नारायण को प्रत्यक्ष दिखाई देने वाला देवता कहा गया हैं, और इनकी उपासना, इनके मंत्रों का जप और इन्हें अर्घ्य चढ़ाने से व्यक्ति के सारे कष्टों का निवारण हो जाता हैं। क्योंकि धरती के सभी प्राणी मात्र के जीवन दाता स्वयं श्री सूर्यनारायण ही हैं । अगर कोई व्यक्ति किसी कष्टों में है तो सूर्य को अर्घ्य चढ़ाने से उनके कष्ट दूर हो जाते हैं, इसिलिए सूर्य को जल चढ़ाने की परंम्परा हैं । सूर्य को जल केवल तांबे के पात्र में दिया जाता हैं, शीशे,



प्लास्टिक, सोने चांदी, पीतल आदि किसी भी धातु के बर्तन का प्रयोग सूर्य को अर्घ्य देने

में भूलकर भी नहीं करें ।   इस मंत्र का करें जप मनोवांछित फल पाने के लिए प्रतिदिन सूर्य उदय से एक घंटे पहले से 1 घंटे बाद तक ही इन मंत्रों का जप 108 बार करें । ।। ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा ।।   ।। ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात ।। ।। ॐ भास्कराय विद्महे दिवाकराय धिमही तन्नो सूर्यः प्रचोदयात ।। ।। ॐ घृणि सूर्याय नमः ।।  वेद में इन मंत्रों में से भी गायत्री मंत्र को सर्वोपरि बताया गया हैं । मंत्र का जप करने के बाद सीधे हाथ में जल लेकर अपने चारों ओर सुरक्षा कवच स्थापित हो रहा हैं इस भाव से छिड़कना चाहिए, फिर अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार दाहिने हाथ की ओर से घुमकर परिक्रमा करना चाहिए । इस पूरे क्रम के बाद सूर्य को तांबे के पात्र से अर्घ्य दें । ऐसा करने से उपासक के उपर सूर्य की कृपा बरसने लगती है ।   ऐसे दे सूर्य को अर्घ्य   1- सूर्योदय की प्रथम किरण में अर्घ्य देना सबसे उत्तम माना गया है ।2- तांबे के पात्र में ही सूर्य को अर्घ्य दें । 3- लाल चंदन आदि से युक्त लाल पुष्प, चावल आदि तांबे के पात्र में रखकर तीन

बार जल में ही मंत्र पढ़ते हुए फिर जल अर्पण करें ।4- ध्यान रखें जल अर्पण करते समय जो जल सूर्यदेव को अर्पण कर रहें है वह जल पैरों को स्पर्श न करे । 5- यदि सूर्य भगवान दिखाई नहीं दे रहे है तो कोई बात नहीं आप प्रतीक रूप में पूर्व दिशा की ओर मुख करके ही जल दे जो स्थान शुद्ध और पवित्र हो ।6- किसी आने जाने के रास्ते पर भूलकर भी अर्घ्य (जल अर्पण) नहीं करें । 7- अर्घ्य देने के बाद दोनों हाथो से जल और भूमि को स्पर्श करे और ललाट, आँख कान तथा गला छुकर भगवान सूर्य देव को प्रणाम करें ।   कहा जाता हैं कि सूर्य को जल चढ़ाने से अन्य सभी ग्रह भी मजबूत होते हैं । यदि आप पर सूर्य की कृपा है तो जीवन और काम काज में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं । साथ ही धन प्राप्‍त‍ि के योग भी बनते हैं । सूर्य की किरणों से मिलने वाली एनर्जी से शरीर के अंग सुचारू रूप से काम करते हैं । 50,000 से भी ज्यादा लोगों को मिला अपनी कम्युनिटी से सही रिश्ता। FamilyShaadi.com। " आज ही रजिस्टर करें | जीवनसंगी की तलाश है? तो आज ही भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें

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